जब सूरज आ गया धरा पे,
तुझसे मिलने की चाह थी जागी और बाते थी ज़ुबान पे

तेरी मुस्कान देखने को हम तरसते हैं ,
क्योंकि तेरे और मेरे मिलने वाले बादल कम ही बरसते हैं।

तेरे इंतज़ार में खड़े हैं उस राह पे
जहां से लाखों लोग गुज़रते हैं।
लाखों लोग में ढूढ़ते तुझे
लगता जैसे एक बरस से इधर खड़े हैं.

तू आया तो सही ,
बाते भी करती तुझसे ,
मगर मुझे लेने आने वाली गाड़ी थी समय पे।

गाड़ी पे बैठ गयी इस आशा से ,
की आएगा कल तू समय पे। ……
आएगा तू समय पे।

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